यहुशुआ के दूसरे आगमन का वादा पिछले लगभग २००० वर्षों से ह्रदय में संजोकर रखा गया वादा है.
इसने दुखी आत्माओं को बलवान किया और असहाय और टूटे ह्रदय को ढाढस दिया है. यहुशुआ चाहता है कि उसके लोगों को उसके दूसरे आगमन के लिये तैयार करे. उसने सभी को चितौनी दी कि सब चौकस रहें और अग्रदूत के समान दिये गये चिन्हों की ओर देखते हुए उसके वापस आने के लिये तैयार रहें. शैतान चाहता है कि लोग अकस्मात लिये जावें. वह जानता है कि जब यहुशुआ वापस आएगा तब अंतिम लड़ाई लड़ी जा चुकी होगी और अन्त में वह बड़ा विवाद भी समाप्त हो जाएगा. यहुशुआ के आने के समय प्रत्येक व्यक्ति के प्रकरण का सदा के लिये निर्णय हो जायेगा. इसीलिए शैतान चाहता है कि लोग तैयार न रहें ताकि दूसरे आगमन में वे अकस्मात ही ले जाये जाएँ और वे नष्ट हो जाएँ.
शैतान के पास एक
बहुत ही अधिक कामयाब झूठ यह है कि यहुशुआ के दूसरे आगमन के बाद पापियों के लिये
दूसरा मौका है. यह एक बहुत ही आम धारणा है
कि “रैपचर” यह सिखाता है कि यहुशुआ अकस्मात ही लौटेगा और अपने लोगों को पृथ्वी पर
से ले जाएगा. यह भी विश्वास किया जाता है कि “धर्मियों के रैपचर के बाद “ सारी
पृथ्वी सात वर्षों के लिए महान क्लेश में डाल दी जाएगी इस समय में ख्रीष्ट-विरोधी
का शासन होगा और वह पृथ्वी पर अपने बड़े अधिकार का प्रयोग करेगा. यह एक बहुत ही
खतरनाक विश्वास है.
यह न सिर्फ धर्मग्रन्थ में नहीं पाया जाता परन्तु यह लोगों को यह समझने में अगुवाई करता है कि उनके पास उद्धार को प्राप्त करने के लिये जितना वास्तविक समय है, उससे कहीं अधिक उपलब्ध है. अपने हृदयों को कर्मठता पूर्वक खोजने और अपने ज्ञात पापों के लिये पश्चाताप करने के बदले जो लोग रैपचर पर विश्वास करते है उनके पास सुरक्षा का झूठा ज्ञान होता है कि यदि वे गुप्त रैपचर में नहीं गये तौभी वे रैपचर के बाद महान क्लेश के दौरान भी पश्चाताप कर सकते हैं.
बाइबल स्पष्ट रूप से बताती है कि “इसलिए कि सबने पाप किया है और यहुवह कि महिमा से रहित हैं”. (देखें रोमियों ३:२३). बहुत ही शालीनता पूर्वक स्वर्ग द्वारा प्रत्येक नर-नारी को यह स्वीकृति दी जा चुकी है कि वे यह चुनें की किसकी सेवा करेंगे. परिवीक्षा की अवधि यहुशुआ के बादलों में दिखाई देने के थोड़ा ही पहले समाप्त हो जाएगी. उस समय उद्धारकर्ता यह घोषणा करेगा
“जो अन्याय करता है, वह अन्याय ही करता रहें;और जो मलिन है वह मलिन ही बना रहें; और जो धर्मी है वह धर्मी बना रहे; और जो पवित्र है वह पवित्र बना रहे . देख मैं शीघ्र आनेवाला हूँ; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है.”(प्रकाशितवाक्य २२:११-१२).
यहुशुआ के आने के
बाद कोई तीसरा मौका नहीं दिया जाएगा, जब वह आएगा अपने साथ प्रतिफल लाएगा . गुप्त रैपचर का विचार
बाइबल के सन्दर्भ में से लिये गए कुछ वचनों पर आधारित है.
“उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा, दो स्त्रियाँ चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा”. (मत्ती २४:४०-४२).
यह वचन क्लेश के पहले गुप्त रैपचर के आधार के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह यहुशुआ के द्वारा एक उदाहरण का संक्षिप्त वर्णन दिया गया है. यहुशुआ ने बताया कि अन्त में दो प्रकार के लोग होंगे : वे जो बचे गये और वे जो नष्ट हुए. उसने इसकी तुलना ऐसे की जैसे बाढ़ के समय सभी अपनी इच्छा से यह तय कर लेते हैं की वे बचेंगे या नहीं.
“जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा. क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते पीते थे, और उनमें विवाह होते थे.और जब तक जल-प्रलय आकर उन सबको बहा न ले गया, तब तक उनको कुछ भी मालूम नहीं पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा . उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा, दो स्त्रियाँ चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा”(मत्ती २४:३७-४२)
यहुशुआ ने नूह के दिन और संसार के अन्त के दिनों के बीच एक तुलनात्मक चित्रण किया. नूह के दिनों में जिन्होंने आज्ञा पालन को चुना वे नाव में बचा लिये गये. वे जिन्होंने आज्ञा पालन करने से इनकार कर दिया वे बाहर छोड़ दिये गए और नाश हो गये. लोग जो बाहर छोड़ दिये गये उन्हें दूसरा मौका नहीं दिया गया. उनकी परख की अवधि समाप्त हो गई और वे बाढ़ में नाश हो गए . उनके लिये दूसरा मौका नहीं था और दूसरे आगमन के बाद कोई दूसरा (तीसरा) मौका नहीं होगा. यहुशुआ ने स्पष्ट रूप से सिखाया कि संसार के अन्त तक धर्मी और बुरे लोगों का कोई अलगाव नहीं होगा. एक दृष्टान्त में उसने स्पष्ट किया कि :
“कटनी तक दोनों को एक साथ बढने दो, और कटनी के समय मैं काटने वालों से कहूँगा कि पहले जंगली दाने के पौधे बटोर कर जलाने के लिये उनके गठ्ठे बांध लो, और गेहूँ को मेरे खत्ते में इकठ्ठा करो” (मत्ती १३:३०).
इसलिए कि किसी और प्रकार की शंका न रहे यहुशुआ ने स्पष्ट किया:
“खेत संसार है, अच्छा बीज राज्य की सन्तान, और जंगली बीज दुष्ट की सन्तान हैं. जिस शत्रु ने उनको बोया वह शैतान है; कटनी जगत का अन्त है, और काटने वाले स्वर्गदूत हैं. अत: जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा. मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करने वालों को इकट्ठा करेगें और उन्हें आग के कुण्ड में डालेंगे, जहाँ रोना और दांत पीसना होगा. उस समय धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य के समान चमकेंगे. जिसके कान हों वह सुन ले.” (मत्ती १३:३८-४३).
यहुशुआ के स्वयं के द्वारा दी गई घटनाओं के क्रम के अनुसार ऐसा है कि धर्मी और दुष्ट जगत के अन्त तक साथ साथ रहेंगे. तब उस समय दुष्ट पहले गठ्ठर बना कर नाश करने के लिए एकत्रित किए जाएंगे . दुष्टों के अलग किये जाने के बाद ही “धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य के समान चमकेंगे”. (मत्ती १३:४३) गुप्त रैपचर की यह शिक्षा कि जगत के अन्त के पहले धर्मी उठा लिये जायेंगे, धर्मशास्त्र के विपरीत है. यहुशुआ जानता है की उसके पीछे चलने वाले विश्वासी जगत के अन्त तक पृथ्वी पर रहेंगे. कोई ऐसा गुप्त आगमन नहीं होगा जो उनको उस महान क्लेश के समय के पहले चुपके से उठा ले जावे
यही कारण है कि उसके द्वारा स्वर्गारोहण से पूर्व अंतिम अभिलिखित शब्द प्यारे आश्वासन बन गए,
“...और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ .” (मत्ती २८:२०). गुप्त रैपचर का सिद्धान्त यह सिखाता है कि केवल धर्मियों के चुपके से इस पृथ्वी से ले जाने के बाद ही ख्रीष्ट विरोधी प्रगट होगा. यह बाइबल के एकदम विपरीत है धर्मग्रन्थ बताता है कि यहुशुआ अपनी बाट जोहने वाले लोगों के लिये तब तक वापस नहीं आएगा जब तक कि ख्रीष्ट विरोधी प्रगट न हो जाएगा .
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गुप्त रैपचर की यह शिक्षा कि जगत के अन्त के पहले धर्मी उठा लिये जायेंगे, धर्मशास्त्र के विपरीत है. |
“ किसी रीति से धोखे में न आना, क्योंकि वह दिन न आएगा जबतक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरुष अर्थात विनाश का पुत्र प्रगट न हो. जो विरोध करता है, और हर एक से जो ईश्वर का पूज्य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आपको ईश्वर ठहराता है. तब वह अधर्मी प्रगट होगा,जिसे प्रभु यहुशुआ अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा, और अपने आगमन के तेज से भस्म करेगा. उस अधर्मी का आना शैतान के कार्य के अनुसार सब प्रकार की झूठी सामर्थ्य, और चिन्ह,और अदभुत काम के साथ (देखिए २थिस्लुनिकियो २:३,४,८&९).
प्रकाशितवाक्य में विश्वासियों और धर्मियों के लिए जो इस पृथ्वी पर जगत के अन्त तक बने रहेंगे एक बहुमूल्य वादा है.
“ तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है,इसलिए कि मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूंगा जो पृथ्वी पर रहने वालों के परखने के लिये सारे संसार पर आने वाला है. मैं शीघ्र आने वाला हूँ; जो कुछ तेरे पास है उसे थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले.”(प्रकाशितवाक्य ३:१०,११).
इस वाक्यांश को गुप्त रैपचर के पक्ष में उपयोग किया गया है लेकिन वास्तव में यह उसकी अपने लोगों के साथ अन्त तक बने रहने की एक स्पष्ट सशक्त सिद्ध अभिपुष्ठी है. यहुशुआ के क्रूस पर चढ़ाए जाने की शाम के पहले उन सब के लिए जो अन्त समय तक उस पर विश्वास करते है उसने प्रार्थना की
“ अब मैं तेरे पास आता हूँ, और ये बातें जगत में कहता हूँ, कि वे मेरा आनन्द अपने में पूरा पाएँ. मैंने तेरा वचन उन्हें पहुँचा दिया है; और संसार ने उनसे बैर किया, क्योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं. मैं यह बिनती नहीं करता कि तू उन्हें जगत से उठा ले; परन्तु यह कि तू उन्हें उस दुष्ट से बचाए रख. (यहुन्ना १७:१३-१५).
धर्मी अन्त तक इस पृथ्वी से नहीं निकाले जाएंगे इसलिए यह सशक्त वादा दिया गया. किसी को भी पवित्र नियम मानने के लिए भविष्य में और किसी सुविधाजनक समय कि बाट न जोहते हुए देरी नहीं करना चाहिए. वह समय कभी नहीं आएगा आज उद्धार का समय है. यहुशुआ के आने के बाद कोई दूसरा (तीसरा) मौका नहीं दिया जाएगा . जैसा कि हम जानते हैं कि दूसरा आगमन इस पृथ्वी के जीवन का अन्त है. इसका अर्थ उनके लिये जो उद्धारकर्ता को ग्रहण नहीं करते हैं अनन्त मृत्यु और उनके लिए जो उसे ग्रहण करते हैं अनन्त जीवन का आरम्भ है.
“..देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी वह उद्धार का दिन है.”(२कुरन्थियो ६:२).
कोई दूसरा मौका नहीं है आज ही चुनिए कि आप किसकी सेवा करेंगे .



