World's Last Chance

At the heart of WLC is the true God and His Son, the true Christ — for we believe eternal life is not just our goal, but our everything.

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“विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम-काज करना: परंतु सातवाँ-दिन…विश्रामदिन है।” (निर्गमन 20:8-10)

बाईबल की आज्ञाओं का पालन करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए, प्रश्न है कि: “पहला दिन कौन सा है?” सभी सात तक गिनती कर सकते है, परंतु गिनती कहाँ से शुरु होती है? आप कैसे जान सकते है कि सातवाँ-दिन सब्त कौन सा है? सृष्टिकर्ता जिसने सप्ताह को बनाया महीने को भी सात उंगलियाँ दिखाता एक लड़कारुपांकित किया जिसमें उस सप्ताह को रखा जाये। सृष्टि का कैलेंडर नये चाँद के दिन के साथ शुरु होता है, जिसके बाद चार पूर्ण सप्ताह आते है। प्रत्येक सप्ताह में कार्य करने के 6 दिन और एक सातवाँ-दिन सब्त का विश्राम शामिल होता है।

आदि में, सृष्टिकर्ता ने समय को मापने के लिये सूर्य और चन्द्रमा की गति को रचा।

“दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अंतर में ज्योतियां हो; और वे चिन्हों, और नियत समयो [H41501; धार्मिक सभाओं] और दिनों, और वर्षों के कारण हो; …दो बड़ी ज्योतियां [निर्धारित थी]…आकाश के अंतर में…दिन और रात पर प्रभुता करें…” (उत्पत्ति 1:14, 16-18)

समय को केवल गति के द्वारा ही मापा जा सकता है। सूर्य का घूर्णन एक दिन को मापता है। 365 ¼ दिनों में, सूर्य और पृथ्वी अपने सापेक्षित स्थान पर लौट आते है। यह एक सौर वर्ष है। चन्द्रमा की 29 ½ दिनों की परिक्रमा एक चन्द्र-मास (लूनेशन) को मापती है, जो कि महीने का आधार है। 12 ⅓ लूनेशन्स एक सौर वर्ष के समान लम्बे होते है।

यहाँ सूर्य और चंद्र की गति का उपयोग करते हुए तीन प्रकार के मूल कैलेंडर प्रारुप है:

1.सौर: सूर्य और पृथ्वी की गति की माप।

सौर कैलेंडर सूर्य का उपयोग केवल वर्ष की लम्बाई मापने के लिये कर रहे हैं। महीनों की मनमानी लम्बाई से प्रकृति का कोई सम्बंध नहीं। ग्रेगोरियन सौर कैलेंडर पर साप्ताहिक चक्र निरंतर चलते रहते है। यहां तक की हर चार वर्षों में आने वाला अधि दिवस (लीप) भी साप्ताहिक चक्र को भंग नहीं करता हैं।

2.चन्द्र: चन्द्रमा की गति की माप।

चन्द्र कैलेंडर पूरी तरह से चाँद के चक्र पर आधारित होते है। महीने, जो कि अमावस्या के बाद प्रथम भोर से शुरु होकर, सौर वर्ष से बिना समायोजन के निरंतर चलते रहते है। क्योंकि 12 चन्द्र मास एक सौर वर्ष से 11 दिनों में छोटे है, चन्द्र मास ऋतुओं में चलायमान रहते है।

3.चन्द्रसौर:चन्द्र-मास, सौर वर्ष से स्थिर किये गये है।

सूर्य और चन्द्रमा के एकसाथ कार्य करने से एक चन्द्र-सौर कैलेंडर बनता है। एक 13वे महीने को सात बार 19 वर्षों में जोड़कर लूनेशन्स को सबसे लम्बे सौर वर्ष से समायोजित किया जाता है। साप्ताहिक चक्र प्रत्येक नये चाँद के साथ पुन: आरम्भ होता है। हर चन्द्र-मास चार पूर्ण सप्ताहों का होता है।

सृष्टि के समय स्थापित किया गया कैलेंडर चन्द्र-सौर है। यह समय को निर्धारण करने की सारी प्रणालियों में सबसे सही और सटीक है।

धर्मशास्त्र में, प्रत्येक चन्द्र-मास उपासना के एक विशेष दिन के उत्सव के साथ आरम्भ होता है: नये चाँद का दिन। चूंकि यह एक उपासना का दिन है, यह हर महीनें के प्रथम सप्ताह में 6 कार्य दिनों के हिस्से की तरह नहीं गिना जा सकता है। नये चाँद का दिन खगोलीय अमावस्या के बाद प्रथम भोर के साथ शुरु होता है जो संगम के नाम से भी जाना जाता है। 6 कार्य दिनों के बाद और फिर एक सातवाँ-दिन सब्त, महीनें का आठवां दिन है। तीन और अधिक सप्ताहों के बाद, 29वे पर समाप्त होता है। दिनों की गणना में और माप के द्वारा 29वे दिन की ओर अग्रसर हो रहे, अमावस्या के समय का खुलासा होता है जिससे कोई भी यह निर्धारण कर सकता है कि महीना 29 या 30 दिनों का है। कोई महीना कभी भी 30 दिनों से अधिक का नहीं होता।

सच्चा चन्द्र-सौर कैलेंडर बहुत ही उपयोग-सुलभ है। सप्ताह के दिन हमेशा महीने की समान तारीखों पर पड़ते है। हर बार सातवाँ-दिन सब्त को सृष्टिकर्ता का कैलेंडर imageधर्मशास्त्र में एक विशेष तारीख नियुक्त किया गया है, यह महीनें के हमेशा 8वे, 15वे, 22वे और 29वे दिनों पर पड़ती है।

धर्मशास्त्र में कहा गया है कि चन्द्रमा को विशेष तौर से उपासना के समयो को मापने के लिये बनाया गया था।

“उसने नियत समयो [H41501; उपासना के समयो] के लिये चन्द्रमा को [नियुक्त] बनाया है।” (भजन संहिता 104:19 )

सृष्टि का सप्ताह, सब्त दिन के विश्राम के साथ समाप्त हुआ। निर्गमन 31 में कहा गया है कि सब्त को पीढ़ी दर पीढ़ी माना जाये।

निश्चय तुम मेरे विश्राम दिनों को मानना, क्योंकि तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में मेरे और तुम लोगों के बीच यह एक चिन्ह ठहरा है, जिस से तुम यह बात जान रखो कि यहुवाह हमारा पवित्र करनेहारा है। (देखिए निर्गमन 31:13)

सातवाँ-दिन सब्त सृष्टिकर्ता के द्वारा अपने और उसके लोगों के बीच निष्ठा का प्रतीक होने के लिये बनाया गया था। शत्रु, लुसिफर ने व्यवहारिक कैलेंडर को बदल दिया और सृष्टिकर्ता के प्रति उचित उपासना को भी चुरा लिया। परम्परा और धारणा के माध्यम से, लुसिफर ने विश्व को निरंतर साप्ताहिक चक्र में चलने वाले सौर कैलेंडर का उपयोग करने के लिये एकमत कर लिया है। जब कोई व्यक्ति उपासना करता है, तो प्रगट हो जाता है कि वह किसकी उपासना करता है। वे लोग जो अपने उपासना के दिनों की गणना करने के लिये सौर कैलेंडर का उपयोग करते है, वे अनजाने में अपनी निष्ठा और उपासना उस महा धोखेबाज को अर्पित कर रहे है।

जो सृष्टिकर्ता के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने की इच्छा रखते है, अवश्य ही सृष्टिकर्ता की उपासना उस दिन करना चाहेंगे जो दिन उन्होंने नियुक्त किया है। उपासना के सही दिन का पता लगाने के लिये, सृष्टि के समय स्थापित किया गया चन्द्र-सौर कैलेंडर का उपयोग करना चाहिए।

धर्मशास्त्र से प्रगट होता है कि समूचे अनंतकाल तक उपासना के लिये उपयोग किया जाने वाला कैलेंडर नये चाँद पर आधारित होगा:

“फिर ऐसा होगा कि एक नये चाँद से दूसरे नये चाँद के दिन तक और एक विश्राम दिन से दूसरे विश्राम दिन तक समस्त प्राणी मेरे सामने दण्डवत् करने को आया करेंगे।” (यशायाह 66:23)

आप किसकी उपासना करते है? आप किसे अपनी निष्ठा प्रदान करते है? जिस कैलेंडर का आप अपनी उपासना का समय मापने के लिये उपयोग करते है उससे पता चलता है कि आप किस ईश्वर की उपासना करते है।


1 “जब यहूदी त्यौहार नियमित अंतराल पर घटित हुए, यह शब्द उनके साथ निकट रुप से पहचाना गया था…Mo’ed (मोएड) का सभी धार्मिक सभाओं के लिए व्यापक अर्थों में प्रयोग किया गया था। यह खुद निवासस्थान के साथ करीब से जुड़ा हुआ था…[यहुवाह] वहाँ इस्त्राएलियो से विशिष्ट समयो पर अपनी इच्छा को उजागर करने के प्रयोजन से मिला था। यह एक आम शब्द है, उपासनाओं की सभाओं के लिए…[यहुवाह के] लोग।” (देखिए #4150, “लेक्सिकल ऐईड़स टू दा ओल्ड़ टेस्टामेंट,” हिब्रु-ग्रीक की वर्ड स्टडी बाईबल, KJV.)

While WLC no longer believes that the annual feast days are binding upon believers today, we humbly encourage all to set time aside to commemorate them with solemnity and joy, and to learn from Yahuwah’s instructions concerning their observance under the Old Covenant. Doing so will surely be a blessing to you and your home, as you study the wonderful types and shadows that point to the exaltation of Messiah Yahushua as the King of Kings, the Lord of Lords, the conquering lion of the tribe of Judah, and the Lamb of Yahuwah that takes away the sins of the world.

मूसा ने एक तम्बू लिया और इसे इस्त्राएल के डेरे से बाहर खड़ा किया। वह इसे Mo’edim का तम्बू कहता था। यह डेरे के बीच में निवासस्थान नहीं था। वो पवित्र स्थान तब तक बनाया ही नहीं गया था। Mo’edim का तम्बू आम और साधारण था जिसे एक विशेष प्रयोजन के लिए अलग किया गया था। यहाँ यहुवाह अपने नियत समयों पर मिलते थे। Mo’edim का अनुवाद जैसे कि: तम्बूनियुक्त समय, मंडली, सभा, दिनों, चिन्ह, आराधनालय, ऋतुएं और पर्व के लिए किया गया है। हालाँकि शब्दों की यह सूची हिब्रू शब्द के पूर्ण अर्थ को व्यक्त नहीं करती है।

“Mo’ed का सभी धार्मिक सभाओं के लिए व्यापक अर्थों में प्रयोग किया गया था। यह खुद निवासस्थान के साथ करीब से जुड़ा हुआ था…[यहुवाह] वहां इस्त्राएलियों से विशिष्ट समयों पर अपनी इच्छा को उजागर करने के प्रयोजन से मिला करता था। यह [यहुवाह] के लोगों की उपासनाओं की सभाओं के लिए…एक आम शब्द है।” (“Lexical Aids to the Old Testament, “Hebrew-Greek Key Word Study Bible, p.1626.)

mo’ed के जो विभिन्न अर्थ है उनमें “नियुक्त समय” प्रमुख आधार है।” (Mo’ed, #4150,The New Strong’s Expanded Dictionary of Bible Words.)

सृष्टिकर्ता, उपासना के निश्चित समय के बारे में एक विशिष्टता रखते है। आदि में उसने एक समय-पालन की प्रणाली को रचा, कैलेंडर, जिसके द्वारा उसके नियुक्त समयों की, उसके Mo’edim की, गणना की जाये।

“फिर एलोहीम ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।” (देखिए उत्पत्ति 1:14)

ज्योतियों को आकाश में उनकी गति के द्वारा समय को मापने के लिए बनाया गया था। बिना गति के समय का कोई माप नहीं है। सूर्य दिनों….और वर्षों को मापने के लिए दिया गया था। चन्द्रमा एक वर्ष के हिस्से के रूप में महीनों या लूनेशन्स को मापता है। छ: कार्य दिवसों के बाद सातवाँ-दिन का विश्राम, सप्ताह के लिए नमूना था। समय के इस छोटे खंड को महीने के भीतर सृष्टि निर्माण पर स्थापित किया गया था।

सूर्य और चन्द्रमाआधुनिक मूर्तिपूजक/ पोप कैलेंडर में निरंतर साप्ताहिक चक्र है। सृष्टि का कैलेंडर प्रत्येक नये चाँद के दिन के बाद साप्ताहिक चक्र को पुनः आरंभ करता है। इस कारण, धर्मशास्त्र में सातवें-दिन सब्त के लिए हर बार एक तारीख दी गयी है, यह हमेशा चंद्र-मास की 8वी 15वी 22वी या 29वी है।

स्वर्ग के रचयिता ने चन्द्रमा को खास तौर से उसके mo’edim, उपासना के नियुक्त समयों को मापने के लिए बनाया।

“उसने नियत समयों [#4150] के लिए चन्द्रमा को नियुक्त किया है।” भजन संहिता 104:19

दूसरे शब्दों में,

“उसने चन्द्रमा को mo’edim के लिए बनाया है, अपनी उपासना के नियुक्त समय के लिए।

धर्मशास्त्र नौ बार उपासना के लिए नियत समयों को सुचिबद्द करता है:

इन दिव्य रूप से नियुक्त समयों को केवल एक कैलेंडर पर पाया जा सकता है जो समयों को मापने के लिए चन्द्रमा का उपयोग करता है। लेव्यवस्था का 23वां अध्याय हवाला देता है जैसे यहुवाह कह रहा है कि सातवाँ-दिन सब्त और सभी वार्षिक पर्व उसके mo’edim, उसकी उपासना के लिए नियुक्त समय है।

‘और यहुवाह ने मूसा से कहा, इस्त्राएलियों से कह, कि यहुवाह के पर्व जिनका तुम को पवित्र सभा एकत्रित करने के लिये [नियत समयों] पर प्रचार करना होगा, मेरे वे पर्व [नियत समय] ये हैं।

Biblical Lunar-Solar Calendar

धर्मशास्त्र में सातवें-दिन सब्त के लिए हर बार एक तारीख दी गयी है, यह हमेशा चंद्र-मास की 8वी 15वी 22वी या 29वी है।

‘छ: दिन कामकाज किया जाए, पर सातवां दिन परमविश्राम का और पवित्र सभा का दिन है; उस में किसी प्रकार का कामकाज न किया जाए; वह तुम्हारे सब घरों में यहुवाह का विश्राम दिन ठहरे।

‘फिर यहुवाह के पर्व [नियत समयों] जिन में से एक-एक के ठहराये हुए समय [mo’edim] में तुम्हें पवित्र सभा करने के लिये प्रचार करना होगा वे ये हैं।

‘पहिले महीने के चौदहवें दिन को गोधूलि के समय यहुवाह का फसह हुआ करें। और उसी महीने के पंद्रहवें दिन को यहुवाह के लिये अखमीरी रोटी का पर्व हुआ करें;….और वह [याजक] उस पूले को यहुवाह के सामने हिलाए….वह उसे विश्रामदिन के दूसरे दिन हिलाए….

विश्रामदिन के दूसरे दिन, जो तुम हिलाई जाने वाली भेंट के पूले को लाओगे, उस दिन से तुम स्वयं ही सात विश्रामदिनों को गिन लेना; उन्हें पूरा होना अवश्य है। फिर सातवें विश्रामदिन के बाद, तुम पचास दिनों को गिन लेना तब तुम [यहुवाह] के लिए नया अन्नबलि चढ़ाना…[Fenton Translation]

सातवें महीने के पहिले दिन को तुम्हारे लिये परमविश्राम हो; उस में स्मरण दिलाने के लिये नरसिंगे फूंके जाएं, और एक पवित्र सभा इकट्ठी हो…सातवें महीने का दसवां दिन प्रायश्चित्त का दिन माना जाए; वह तुम्हारी पवित्र सभा का दिन होगा…

‘सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन से सात दिन तक यहुवाह के लिये झोंपडिय़ों का पर्व रहा करें।

‘यहुवाह के नियत पर्व [नियुक्त समय] ये ही हैं…पवित्र सभा का प्रचार करना…[इनके अलावा] इन सभों से अधिक यहुवाह के विश्रामदिनों को मानना…” (देखिए लेव्यवस्था 23.)

लेव्यवस्था का 23वां स्थापित करता है कि सातवां-दिन सब्त और वार्षिक पर्व, सभी उपासना के लिए नियुक्त समय: mo’edim होते है। वे सभी सृष्टिकर्ता द्वारा निर्दिष्ट किये हुए बेशकीमती उपहारों, तारागण से गणना किये गये है: चन्द्रमा से।

“आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और [नियत समयों],…के कारण हो।” (उत्पत्ति 1:14)

इसके अलावा समय को मापने के लिए सृष्टिकर्ता ने आकाश की ज्योतियों को निष्ठा के चिन्ह के रूप में कार्य करने को नियुक्त किया है जो आज्ञा मानने वालो को आज्ञा न मानने वालो से अलग करता है। यहुवाह की कैलेंडर प्रणाली वह चिन्ह है जो उजियाले की संतान को अंधियारे की संतान से अलग करता है।

समूचे संसार में यहुवाह के सभी विश्वास योग्य लोग अपनी निष्ठा को सृष्टिकर्ता की उपासना के द्वारा उसके नियुक्त समयों पर समर्पित करने के लिए एकत्र होंगे।

“क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूं, मेरे सम्मुख बनी रहेगी, उसी प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; यहुवाह की यही वाणी है। फिर ऐसा होगा कि एक नये चाँद से दूसरे नये चाँद के दिन तक और एक विश्रामदिन से दूसरे विश्रामदिन तक समस्त प्राणी मेरे सामने दण्डवत् करने को आया करेंगे; यहुवाह का यही वचन है।”

(यशायाह 66:22 और 23)

क्या आप अपनी निष्ठा सृष्टिकर्ता को समर्पित करना चाहते है? स्वर्ग और पृथ्वी पर विश्वासी एवं निष्ठावान लोगों के साथ शामिल हो जाइये। सृष्टिकर्ता की उपासना, उसकी घड़ी: चन्द्रमा के द्वारा गणना किये गये नियुक्त समयों पर करें।

धारणाएं खतरनाक होती है – खासकर जब वे धर्म के दायरे में बनायी गयी हो। यदि कोई अध्यात्म सम्बंधी विश्वास एक गलत धारणा पर आधारित हो, तब उससे संबंधित धार्मिक अभ्यास भी त्रुटिपूर्ण और गलत होंगे। मसीही जगत में सबसे आम धारणा यह है कि, शनिवार बाईबल के अनुसार विश्रामदिन है, और जिस दिन पर यहुशूआ पुनर्जीवित हुआ था; रविवार का दिन है। ये मान्यताएं एक और धारणा पर बनी है: कि आधुनिक सप्ताह जब से सृष्टि हुई, लगातार और बिना किसी रुकावट के निरंतर चक्कर लगा रहे है। जूलियन कैलेंडर के तथ्य हालाँकि इन धारणाओं को झूठे साबित करते हैं।

जूलियन कैलेंडर, ४५ ई.पू. में स्थापित किया गया था। पहले के रोमन गणराज्य के कैलेंडर की तरह ही, प्रारंभिक जूलियन कैलेंडर के एक सप्ताह में आठ दिन हुआ करते थे! रिपब्लिक और जूलियन कैलेंडर पर सप्ताह के दिनों को A से H तक के अक्षर नियुक्त किये गये थे। सभी प्रारंभिक जूलियन कैलेंडर (Fasti) अभी भी अस्तित्व में हैं, (जिसकी शुरुआत 63 ईसा पूर्व से ३७ ईस्वी तक की थी।)

पत्थर का टुकड़ा

आठ दिनों का एक सप्ताह स्पष्ट रूप से इन पत्थर के टुकड़ो पर दिखायी देता है।

Fasti Antiates, calendar of Roman republic = Fasti Antiates, रोमन गणतंत्र का कैलेंडर

Fasti Antiates का पुन:निर्माण, केवल रोमन गणतंत्र का कैलेंडर अभी भी अस्तित्व में है1

जैसे ही रोमन साम्राज्य का विस्तार हुआ यह मिथरा-पूजावाद के संपर्क में आया जोकि जल्दी ही रोम में धार्मिक-पंथ बन गया। मिथरा-पूजावाद ग्रहीय देवताओं के नामों वाला एक सात-दिन के सप्ताह को अपने साथ लेकर आया।

“इसमें कोई संदेह नहीं किया जाता है कि मूर्तिपूजकों द्वारा रविवार को सप्ताह के सबसे पवित्र दिन के रूप में अपनाने में ईरानी [फारसी] रहस्यों के प्रसार का काफी योगदान रहा है। दूसरे 6 दिनों के लिए जो नाम हम अनजाने में उपयोग में लाते है, ठीक उसी समय पर प्रयोग में आये जब मिथरा-पूजावाद ने पश्चिम के प्रांतों में अपने अनुयायियों को जीत लिया और कोई भी इसकी संयोग की जीत और उस सहगामी घटना के बीच सम्बंध स्थापित करने में जल्दबाजी न करें।” (Franz Cumont, Textes et Monuments Figures Relatifs aux Mysteres de Mithra, Vol. I, p. 112.)

“डीएस सोलिस [रवि के दिन] की पूर्व-श्रेष्ठता ने भी निश्चित रूप से एक छुट्टी के रूप में रविवार की सामान्य मान्यता के लिए योगदान दिया। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य के साथ भी, अर्थात, सभी यूरोपीय देशों द्वारा अपनाने के साथ जुड़ा हुआ है।” (Franz Cumont, Astrology and Religion Among the Greeks and Romans, p. 163, emphasis supplied.)

याहुशूआ जिस दिन पर पुनर्जीवित हुआ, वो रविवार का दिन नहीं हो सकता है क्योंकि रविवार जूलियन कैलेंडर के आठ दिनों वाले सप्ताह में उसके अवसर पर अस्तित्व में ही नहीं था। इसके अलावा, शनिवार भी धर्मशास्त्र सम्बंधी सच्चा सब्बात का दिन नहीं हो सकता क्योंकि सात-दिनों वाला ग्रहीय सप्ताह असलियत में शनि के दिन से शुरू हुआ!

रोम में टाईटस के स्नान गृह ७९-८१ ईस्वी में बनाये गये थे। वहाँ एक छड़ी कैलेंडर भी पाया गया जोकि स्पष्ट रूप से शनि को कृषि का देवता, सप्ताह के पहले दिन के देवता के रूप में दिखाता है। ‘डीएस सोलिस’ या सूर्य का दिन, को सप्ताह के दूसरे दिन के रूप में देखा जा सकता है। लूना या चंद्र-देवी मुकुटरूपी वर्धमान चाँद को पहने हुए, सप्ताह का तीसरा दिन है। सप्ताह समाप्त होते है वीनस के दिन, यानी ‘डीएस वेनेरिस’ पर जोकि उस समय का सातवां-दिन था, जो आज के आधुनिक शुक्रवार से मेल खाता है।

= रोम का छड़ी कैलेंडर

रोम का छड़ी कैलेंडर

मूर्तिपूजक ग्रह-संबंधी सप्ताह, जूलियन कैलेंडर की ही तरह जिसने इसे अपनाया, वह भी अपूर्ण ढंग से मूर्तिपूजक ही है। ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि आधुनिक कैलेंडर के उपयोग करने से न तो धर्मशास्त्र संबंधी सब्बात के दिन को और न ही पहले दिन को पाया जा सकता है। अगर विशेष दिन पर आराधना करना महत्वपूर्ण है, तब तो यह भी महत्वपूर्ण है कि उस दिन को गिनने के लिए धर्मशास्त्र संबंधी कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाये।

सृष्टि के चंद्र-सौर कैलेंडर, दोनों सूर्य और चन्द्रमा का उपयोग करते हुए, सच्चे सब्बात का दिन और मसीह के जी उठने का दिन को स्थापित करने का एकमात्र साधन है।)

और जिस दिन पर यहुशूआ (याहुशूआ) पुनर्जीवित हुआ था; रविवार का दिन है।

“उसने नियत समयों के लिये चन्द्रमा को बनाया है।” भजन संहिता १०४ : १९

नियत समयों2 : mo’edim. यहुवाह के लोगों की उपासनाओं की सभाएं।

याहुशूआ के दिनों में इस्त्राएलियों के लिए दो कैलेंडर उपलब्ध थे:

1. मूर्तिपूजक, जूलियन सौर कैलेंडर अपने 8 दिनों के सप्ताह के साथ;
2. बाईबल संबधी, चंद्र-सौर हिब्रू कैलेंडर एक सात दिन के सप्ताह और एक साप्ताहिक चक्र के साथ जो प्रत्येक नये चाँद के साथ शुरू हुआ था।

आपको क्या लगता है इस्त्राएलियों (और याहुशूआ) ने कौन सा कैलेंडर का इस्तेमाल किया?

सृष्टिकर्ता का चंद्र-सौर कैलेंडर

दिन जिस पर आप उपासना करते है, जिस कैलेंडर का उपयोग आप इसे तय करने के लिए करते है, उससे पता चलता है कि आप किसकी उपासना कर रहे है।


1 Palazzo Massimo Alle Terme, ed. Adriano La Regina, 1998.

2 “जब यहूदी त्यौहार नियमित अंतराल पर घटित हुए, यह शब्द उनके साथ निकट रुप से पहचाना गया था। Mo’ed का सभी धार्मिक सभाओं के लिए व्यापक अर्थों में प्रयोग किया गया था। यह खुद निवासस्थान के साथ करीब से जुड़ा हुआ था…[यहुवाह] वहाँ इस्त्राएलियों से विशिष्ट समयों पर अपनी इच्छा उजागर करने के प्रयोजन से मिला करता था। यह [यहुवाह] के लोगों की उपासनाओं की सभाओं के लिए….एक आम शब्द है।” (See #4150,”Lexical Aids to the Old Testament,” Hebrew-Greek Key Word Study Bible, KJV.)

याहुवाह का शत्रु, लूसिफर ने सातवे-दिन सब्बात को खोजने के उपयोग में होने वाले कैलेंडर को बदलने के द्वारा सृष्टिकर्ता को योग्य उपासना को चुरा लिया। परंतु सिर्फ यही नहीं जो उसने बदल दिया। लेकिन उसने यह भी बदल दिया कि दिन कब शुरू होता है! आधुनिक २४-घंटे का “दिन” अर्धरात्री पर शुरू होता है। यहूदी और शनिवार-सब्बात के मानने वाले अपना दिन शुक्रवार की सांझ के समय सूर्यास्त पर करते हैं। हालांकि पवित्रशास्त्र से पता चलता है कि दिन कब शुरू होता है और यह न तो अर्धरात्री है न ही सूर्यास्त।

दिन शुरू होता है भोर पर और समाप्त होता है गोधुली पर। रात चन्द्रमा और तारों द्वारा शासित है, इसलिए, दिन शुरू होता है जब तारे गायब हो जाते हैं-ठीक सुर्योदय से पहले और समाप्त होता है सूर्यास्त के बाद जब वे दिखाई देते हैं।

और रात पर प्रभुता करने के लिए चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करुणा सदा की है। भजन संहिता १३६:९

जिसने दिन में प्रकाश देने के लिए सूर्य को और रात में प्रकाश देने के लिए चंद्रमा और तारागण के नियम ठहराए हैं, जो समुद्र को उछालता और उसकी लहरों को गरजाता है और जिसका नाम सेनाओं का एलोह है, वही याहुवाह यों कहता है: यिर्मयाह ३१:३५

रात गोधूलि पर शुरू होती है और समाप्त होती है भोर पर। कैलेंडर की तारीख एक दिन का पर्याय नहीं है। इसके विपरीत, एक कैलेंडर की तारीख में दिन और रात दोनों भी शामिल हैं, लेकिन यह भोर पर शुरू होता है। दिन, कैलेंडर की तारीख की केवल पहली छमाही है, जबकि रात दूसरी छमाही है।

चक्करदार घड़ीसृष्टि-निर्माण का सप्ताह शुरू हुआ जब सृष्टिकर्ता ने कहा “उजियाला हो” इस दुनिया के पहले सप्ताह का पहला दिन प्रकाश के निर्माण के साथ शुरू हुआ।

…और एलोहीम ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। और एलोहीम ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहला दिन हो गया। (देखिए उत्पत्ति १:४-५)

जब याहुवाह ने उजियाले को अंधियारे से अलग किया, उसने उजियाले को “दिन” कहा, तब उन्होंने परिभाषित किया कि “दिन” दोनों साँझ और भोर से बनाया जा रहा है:

“साँझ और भोर इस प्रकार पहला दिन थे।” (उत्पत्ति १:५ के० जे० वी०)

जब मूसा ने उत्पत्ति की पुस्तक लिखी, उसे “रात” शब्द की कमी नहीं पड़ी। उत्पत्ति में, उन्होंने दिन को परिभाषित करने के लिए परिवर्तन के समय, शाम और सुबह दोनों को शामिल किया। यदि दिन अर्धरात्री या सूर्यास्त पर शुरू हुआ होता तो मूसा ने यह नहीं लिखा होता कि सांझ और भोर दोनों ही दिन के हिस्से थे।

लैव्यव्यवस्था २३:३२ बाइबिल का मुख्य पद है जो “दिन” सूर्यास्त पर शुरू होने के समर्थन के लिए उपयोग किया जाता है:

साँझ से लेकर दूसरी साँझ तक अपना विश्रामदिन माना करना।” (लैव्यव्यवस्था २३:३२)

हांलाकि जब वचन को संदर्भ में पढ़ते हैं, यह स्पष्ट हो जाता है कि इसे हर दिन या यहाँ तक ​​कि सातवें-दिन सब्बात के लिए लागू नहीं किया जा सकता। प्रायश्चित के दिन के बारे में याहुवाह के निर्देशों को लैव्यव्यवस्था २३:२६,३२ सम्मलित करता है। यदि हर दिन साँझ पर शुरू होता तो याहुवाह को प्रायश्चित के दिन को साँझ से पहले शुरू करने के लिए इस्राएलियों को बताने की जरूरत नहीं होती।

“प्रायश्चित का दिन” कैलेंडर की दो तिथियों की समयावधि तक रहता है: नौवीं और दसवीं।

“उसी सातवें महीने का दसवाँ दिन प्रायश्चित का दिन माना जाए;… वह दिन तुम्हारे लिए परमविश्राम का हो, उसमें तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना; और उस महीने के नवें दिन की साँझ से लेकर दूसरी साँझ तक अपना विश्रामदिन माना करना।” (लैव्यव्यवस्था २३:२७, ३२)

यदि दिन शाम से शुरू होता, तो मूसा को केवल यह बताया जाता कि: “प्रायश्चित का दिन सातवें महीने का दसवें दिन है।” दिन उजियाले के आगमन पर शुरू होता है। सांझ नौवे दिन को शुरू नहीं करती। न ही सांझ किसी अन्य दिन को शुरू करती है जिसमें सातवाँ-दिन सब्बात भी शामिल है।

धूपघड़ीसूर्य को दिन पर प्रभुता करने के लिए दिया गया था। दिन उजियाले के आगमन के साथ शुरू होता है और समाप्त हो जाता जब सूर्य को प्रभुता करने के लिए उसके पास ज्यादा प्रकाश नहीं रहता है। कई शताब्दियों बाद मुक्तिदाता ने पुछा: “क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते?” (यूहन्ना ११:९) किसी ने भी उनके साथ तर्क-वितर्क नहीं किया! सभी जानते थे कि दिन उजियाले के आगमन के साथ शुरू होता था। दिन के घंटे बारह भागों में समान रूप से विभाजित किए गए थे, जैसे कि एक धूपघड़ी पर देखा जा सकता है। घंटे गर्मियों में लंबे, और सर्दियों में छोटे थे, लेकिन प्रत्येक दिन के केवल १२ घंटे थे।

क्रुसघात, दफनाये जाने, याहुशुआ के पुनरूत्थान की घटना और सुसमाचार में लिखित लेखे-जोखे, दिन के शुरूआत होने के समय को प्रकट करता है।

सब्त के दिन के बाद सप्ताह के पहिले दिन पह फटते ही मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम कब्र को देखने आईं।। (मत्ती २८:१)

सप्ताह का पहला दिन तब तक शुरू नहीं हुआ था जब तक पूर्वी आकाश में प्रकाश नहीं बढ़ने लगा। इसी प्रकार से, क्रुसघात के बाद, सब्बात सूर्यास्त पर शुरू नहीं हुआ। पवित्रशास्त्र स्पष्ट रूप से कहता है कि याजकों और शासकों ने नहीं चाहा की शव सब्बात के दिन क्रूस पर रहे:

इसलिए कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पिलातुस से विनती की कि उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ, ताकि सब्बात के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्योंकि वह सब्बात का दिन बड़ा दिन था। अत: सैनिकों ने आकर उन मनुष्यों में से पहले की टाँगें तोड़ीं तब दूसरे की भी, जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे; परन्तु जब याहुशुआ के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उसकी टाँगें न तोड़ीं। (यूहन्ना १९:३१-३३)

आमतौर पर क्रुसघात के द्वारा मृत्यु कई दिन लेती है। पीड़ितों की मृत्यु की रफ्तार को बढ़ाने का पूरा उद्देश्य यह था, कि अगले दिन भोर पर सब्बात के शुरू होने से पहले उन्हें क्रुस पर से उतारा जा सके।

जब साँझ हुई तो यूसुफ नामक अरिमतिया का एक धनी मनुष्य, जो आप ही याहुशुआ का चेला था, आया: उसने पिलातुस के पास जाकर याहुशुआ का शव माँगा। इस पर पिलातुस ने दे देने की आज्ञा दी। यूसुफ ने शव लिया, उसे उज्ज्वल चादर में लपेटा, और उसे अपनी नई कब्र में रखा, जो उसने चट्टान में खुदवाई थी, और कब्र के द्वार पर बड़ा पत्थर लुढ़काकर चला गया। (मत्ती २७:५७-६०)

यह सब काफी लंबा समय लिया!

भोर

बाईबल आधारित दिन भोर पर शुरू होता है, सूर्य के प्रकाश के पहले किरण के साथ (सूर्योदय से पहले)।

इस प्रक्रिया में रात-भर का समय लगा! विश्राम दिन “साँझ” पर शुरू नहीं हुआ था, क्योंकि यह बिलकुल वही समय था जब अरमतिया का यूसुफ शव को मांगने के लिए पिलातुस के पास गया!

जब संध्या हो गई तो इसलिए कि तैयारी का दिन था, जो सब्बात के एक दिन पहले होता है, अरिमतिया का रहनेवाला यूसुफ आया, जो महासभा का सदस्य था और आप भी परमेश्वर के राज्य की बाट जोहता था। वह हियाव करके पिलातुस के पास गया और याहुशुआ का शव माँगा। (मरकुस १५:४२,४३)

मुक्तिदाता को दफनाने का काम खत्म हो गया ठीक जैसे ही सब्बात का दिन भोर से शुरू हुआ।

“और उसे [अरमतिया के यूसुफ ने] उतारकर मलमल की चादर में लपेटा, और एक कब्र में रखा, जो चट्टान में खुदी हुई थी; और उसमें कोई कभी न रखा गया था। वह तैयारी का दिन था, और सब्बात का दिन आरम्भ होने पर था।” (लूका २३:५३-५४)

“अनुवादित वाक्यांश ‘drew on (आरम्भ होने पर)’ इस पाठ में, ग्रीक शब्द,…(epiphosko) है। परिभाषा चौंका देने वाली है: ‘to begin to grow light: – begin to dawn.’ यह #2017, . . . (epiphauo) का एक रूप है, जिसका अर्थ होता है ‘उजियाले का बढ़ना . . . भोर का शुरु होना ‘ क्योंकि उन्होंने शव को उतारने, साफ करने और लपेटने आदि की प्रकिया शुरू करने की अनुमति माँगने के लिए साँझ से रात होने तक इंतजार किया था। यह काम करने के लिए उन्हें रात के घंटे लग गए। उनक यह काम तब तक खत्म नहीं हुआ जब तक सब्बात का दिन शुरू होने के लिए उजियाला न हुआ।” (eLaine Vornholt and L. L. Vornholt-Jones, The Great Calendar Controversy, p. 40.)

उजियाले के बनाने बाद सबसे पहला कार्य जो याहुवाह ने किया वो यह था, उजियाले को अंधियारे से अलग करना। इसके बाद उन्होंने दो भागों को नाम दिया जिन्हें वो अलग किए थे। उजियाले के भाग को उन्होंने “दिन” कहा और अंधियारे के भाग को “रात” कहा। यह पवित्रशास्त्र का सिद्धांत है कि जिसे याहुवाह ने जोड़ा है उसे मनुष्य अलग न करें। (देखिए मरकुस १०:९) इसी तरह, जिसे याहुवाह ने अलग किया है, मनुष्य उसे न मिलाए। दावा करना कि दिन अर्धरात्री या सूर्यास्त पर शुरू होता है, दोनों को मिलाना है जो याहुवाह ने अलग किया है।

लूसिफर ने दावा किया कि वह “समयों और व्यवस्था” को बदल देगा। (दानिय्येल ७:२५)। उपासना का दिन, उस दिन को खोजने के लिए उपयोग होने वाला कैलेंडर और यहाँ तक की दिन कब शुरू होता है को बदलने के द्वारा, उसने उपासना जो न्यायोचित रूप से याहुवाह से संबंधित है उसे चुरा लिया।

त्रुटि और परंपरा से मुक्त होइए। दुनिया भर से सत्य को खोजने वालों की बढ़ती संख्या में शामिल हो जाइऐ जो सच्चे सब्बात के दिन को बहाल कर रहे हैं।

“निश्‍चय तुम मेरे विश्रामदिनों को मानना, क्योंकि तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में मेरे और तुम लोगों के बीच यह एक चिह्न ठहरा है, जिससे तुम यह बात जान रखो कि याहुवाह हमारा पवित्र करने हारा है।”
(निर्गमन ३१:१३)


याहुवाह अपनी सृष्टि की आवश्यकता को जानता है. अपने प्रेम में जो उसने खास-तौर पर प्रत्येक के लिए प्रदान किया है. याहुवह जानता है कि मनुष्य को लगातार बिना रुकावट के कार्य नहीं करना चाहिए. हमारी कमजोरी और विश्राम की आवश्यकता और साथ ही साथ आज्ञापालन के लिए उसने समय को विभाजित या अलग-अलग किया. समय का सबसे छोटा टुकड़ा प्रकाश और अन्धकार द्वारा विभाजित दिन है. समय का अगला टुकड़ा लुनेशन (दो नये चाँद के बीच की अवधि) है. इसके बाद चार मौसम आते हैं, ग्रीष्मकाल ,शीतकाल संक्रांति और बसन्त ऋतु, शरद ऋतु दिन रात बराबर होने का समय जो सौर्य वर्ष को विभाजित करता है. समय के ये विभाजन मनुष्य के हाथों से बाहर हैं, जो सीधे सृष्टिकर्ता के प्रभुत्व और ईश्वरीय तत्वों की गति द्वारा नियंत्रित हैं.

sun, moon, and stars“फिर याहुवाह ने कहा, ‘दिन को रात से अलग करने के लिए आकाश के अन्तर में ज्योतियाँ हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों और दिनों, और वर्षों के कारण हों;… और वैसा ही हो गया.” (उत्पत्ति १:१४-१५NKJV)

प्रत्येक लुनेशन का विभाजन चार सब्त में किया जाना था — सातवे दिन की उपासना के साथ छह कार्यदिवस .

तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना. छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब कामकाज करना; परन्तु सातवाँ दिन तेरे याहुवह के लिये विश्रामदिन है……

क्योंकि छ: दिन में याहुवाह ने आकाश और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उनमे है, सबको बनाया, और सातवे दिन विश्राम किया; इस कारण याहुवाह ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया .(देखिये निर्गमन २०:८-११)

याहुवाह अपने सब बच्चों के लिये अधिकार और स्वतंत्रता चाहता है. उसने आज्ञा दी कि लुनेशन या माह का विभाजन चार सबतों में किया जावे और विभाजन को मनुष्यों के हाथों में रखा ताकि मनुष्य चौथी आज्ञा का पालन करते हुए स्वर्गीय एलोहीम के प्रति अपनी अधीनता को प्रदर्शित करें. जबकि सब्त लगभग चाँद के चरणों का अनुसरण करता है यह समय का उतना उपयुक्त और सुस्पष्ट विभाजन नहीं है जितना कि दिन या माह का. याहुवाह ने मनुष्य को जो उनके मन में है करने के लिये मौका देते हुए कि वे आज्ञापालन करें या न करें इसे अपरिभाषित रखना ही उचित समझा.

वे जो अपने स्वामी से प्रेम रखते हैं और उसका आदर करते हैं सप्ताह के सातवे दिन उसकी उपासना करते हैं. उनका लुनेशन माह के तीस दिनों में सात दिनों के चार सप्ताहों में विभाजित होता है जिसमे एक स्थानान्तरण दिन भी होता है. वे जो इस पवित्र आज्ञा का विद्रोह करना चाहते हैं उन्हें आजादी दी गई कि वे ऐसा कर सकते हैं. तीस दिन के लुनेशन का विभाजन १० दिनों के तीन सप्ताहों में भी किया जा सकता है जैसा कि फ्रांस गणतन्त्र के कैलेन्डर में १७९३ से १८०६ तक जबकि फ्रांस सरकार ने फ्रांस को सात दिनों के सप्ताह और क्रिश्चियनिटी से मुक्त करना चाहा. यह पांच दिनों के प्रत्येक सप्ताह के अनुसार छ: सप्ताहों में भी बाटा जा सकता है.

चन्द्र-सौर्य कैलेन्डर के अनुसार सात दिनों के सप्ताह के सातवें दिन उपासना करना सृष्टिकर्ता के प्रति निष्ठा का प्रतीक है. यह उसे जो जीवन और व्यवस्था का देने वाला आज्ञापालन, प्रेम और भक्ति का स्वामी है, स्वीकार करना है. समय विभाजन का आत्मिक कारण मनुष्य को स्वत: मूल्याँकन का समय दिया जाना है. प्रत्येक सातवें दिन का सब्त मनुष्य को याहुवाह की शुद्धता और पवित्रता के सामने लाता है. यह मनुष्य को उसकी असफलता और कुरूपता के तीव्र विरोधाभास में डालता है. ईश्वरीय पवित्रता के सन्मुख एक पश्चातापी पापी चीखता है:

“तब मैंने कहा, ‘ ‘हाय! हाय! मैं नष्ट हुआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठों वाला मनुष्य हूँ; और अशुद्ध होठों वाले मनुष्यों के बीच रहता हूँ, क्योंकि मैंने सेनाओं के याहुवाह महाराजाधिराज को अपनी आँखों से देखा है.’’ (यशायाह ६:५)

प्रत्येक लुनेशन को एक अतिरिक्त उपासना का दिन दिया गया ताकि मनुष्य पिछली लुनेशन की असफलता को जाँच ले और आने वाले लुनेशन के लिये विश्लेषण कर ले. यह उपासना का दिन नये चाँद का दिन है जो प्रत्येक माह के पहले दिन आता है जबकि कार्य का सप्ताह माह के दुसरे दिन आरम्भ होता है. नये चाँद का दिन वह समय है जिसमें मनुष्य अपनी आत्मिक अवस्था का ध्यान कर सकता है. मैंने अपने पिछले लुनेशन में क्या किया? मैं अपनी इच्छा और जीवन को सृष्टिकर्ता के अनुसार लाने के लिये और अलग क्या कर सकता हूँ? यह समय होता है पिछली असफलताओं से क्षमा और आनेवाले माह के लिये सहायता मांगने का. प्रत्येक नये चाँद पर अपडेट की गई पत्रिका उपयोगी हो सकती है. बहुत से लोग नये वर्ष पर विश्लेषण करते हैं पर वे शायद इसे एक या दो माह तक ही रख पाते हैं. याहुवाह मनुष्यों की इस कमजोरी को समझता है और हमें प्रत्येक माह में अपने विश्लेषणों को शुद्ध करने और बनाने का मौका दिया.

आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेन्डर में इसके पूर्व जुलियन कैलेन्डर के समान महीने पूर्णतया चन्द्रमा के Luni-Solar Calendarचक्र से अलग है. समय गणना की इस वैकल्पिक विधी में नये चाँद के दिनों का अस्तित्व नहीं है. तौभी यह नये चाँद के दिनों में याहुवाह की आराधना करने से छूट नहीं देता.

“अभी भी नया चाँद और सब्त मूलत: चाँद के चक्र पर निर्भर हैं…मूलत: नये चाँद को सब्त के समान ही मनाया जाता था, धीरे धीरे इसका महत्व घटता गया जबकि सब्त का दिन एक धर्म और मानवता, धार्मिक चिंतन और अनुदेश, आत्मा की शान्ति और आनन्द में और अधिक बढ़ता गया.” (Universal jewish Encyclopedia , “Holidays,”p 410)

नये चाँद अपने-आप में उपासना के दिन का एक वर्ग है. यह स्वर्गीय उदारता में धन्यवाद की भेंट चढ़ाने और उल्लास का समय होता है. पुरातन काल में ये पर्बों के दिन भी हुआ करते थे. भोजन बनाने का प्रतिबन्ध नये चाँद पर लागू नहीं होता था और धर्मनिष्ट इस्राएली जो अन्य दिनों में उपवास करते थे नये चाँद के दिन कभी भी उपवास नहीं करते थे. नये चाँद के दिनों में याहुवाह के लिये कार्य किये जा सकते थे. जंगल में मिलापवाले तम्बू के बनाये जाने के बाद, मूसा ने नये चाँद के दिन सभी भागों को एकत्रित किया.

“और दूसरे वर्ष के पहले दिन को निवास खड़ा किया गया. मूसा ने निवास को खड़ा करवाया, और उसकी कुर्सियाँ धर उसके तख्ते लगाके उनमें बेंडे डाले, और उसके खम्भों को खड़ा किया; और उसने निवास के उपर तम्बू को फैलाया, और तम्बू के उपर उसने ओढने को लगाया; जी प्रकार याहुवाह ने मूसा को आज्ञा दी थी.” (निर्गमन ४०:१७-१९)

तौभी कोई आय बढ़ाने वाला लेनदेन नहीं किया जा सकता था. सृष्टिकर्ता के साथ समय बिताने के स्वर्गीय अवसर की विद्रोही हृदय कभी सराहना नहीं कर सकता. सदियों बाद इस्राएल के विद्रोहियों ने सब्त और नये चाँद के आने पर व्यापार के मौके खोने का दुःख प्रगट करना आरम्भ किया.

two people exchanging money (a business transaction)

नये चाँद के दिन कोई आय बढ़ाने वाला व्यापार नहीं होना चाहिए.

“जो कहते हो, ‘ ‘नया चाँद कब बीतेगा की हम अन्न बेच सकें? विश्रामदिन कब बीतेगा, की हम अन्न के खत्ते खोलकर एपा को छोटा और शेकेल को भारी कर दें, और छल से दंडी मारें, की हम कंगालों को रुपया देकर, और दरिद्रों को एक जोड़ी जूतियाँ देकर मोल लें, और निकम्मा अन्न बेचें? (आमोस ८:५-६)

यह प्रवृति स्वर्गीय सरकार के विरुद्ध बड़ा राजद्रोह है. सातवे दिन सब्त के समान नये चाँद के दिन भी पवित्र सभा का समय है और इन पवित्र दिनों का अस्वीकार ही इस्राएल के असीरिया द्वारा तख्तापलट के लिये जिम्मेदार है. इससे ठीक अगला पद यह प्रगट करता है कि:

“याहुवाह, जिस पर याकूब को घमण्ड करना उचित है, वही अपनी शपथ खा कर कहता है, ‘ ‘मैं तुम्हारे किसी काम को कभी न भूलूँगा. क्या इस कारण भूमि न कांपेगी? क्या उन पर के सब रहने वाले विलाप न करेंगे? यह देश सब का सब मिस्र कि नील नदी के समान होगा, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है.’ ‘ (आमोस ८:७-८)

जानबूझ कर की गई अवज्ञा को विद्रोह समझा गया है जबकि याहुवाह बड़ी दयालुता से अज्ञानता के समयों पर संकेत करता है. इस्राएल की उपासना एक ऐसे रूप में विकृत हो गई थी जिसका कोई मूल्य नहीं था.

याहुवाह ने इस्राएल की उपासना को यह कहकर अस्वीकार कर दिया :

“मैं तुम्हारे पर्बों से बैर रखता, औए उन्हें निकम्मा जानता हूँ, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्न नहीं. चाहे तुम मेरे लिये होमबलि और अन्नबलि चढाओ, तौभी मैं प्रसन्न न होऊँगा, और तुम्हारे पाले हुए पशुओं के मेलबलियों को ओर न ताकूंगा. अपने गीतों का कोलाहल मुझसे दूर करो; तुम्हारी सारंगियों का सुर मैं न सुनूँगा. (आमोस ५:२१-२३)

इस्राएल जबकि याहुवाह की लगातार उपासना करता रहा लेकिन वास्तव में वे शैतान को आदर दे रहे थे जैसा कि उनके पुरखाओं ने जंगलों में सोने का बछड़ा बना कर किया. याहुवाह चाहता था कि:

“हे इस्राएल के घराने, तुम जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्नबलि क्या मुझी को चढ़ाते रहे? नहीं, तुम तो अपने राजा का तम्बू, और अपनी मूरतों की चरणपीठ, और अपने देवता का तारा लिये फिरते रहे. इस कारण मैं तुमको दमिश्क के उस पर बंधुकाई में कर दूँगा, सेनाओं के याहुवाह का यही वचन है.” (आमोस ५:२५-२७)

Chiun-“ शनिदेव का दूसरा नाम” (The New Strong’s Exhaustive concordance of the Bible)

girl refusing to look at the Bible with her family

खेद है कि आज बहुत से तथाकथित मसीही याहुवाह के पवित्र कैलेन्डर के प्रगामी प्रकाश को अस्वीकार कर रहे हैं.

प्राचीन इस्राएल, ने आधुनिक इस्राएल के समान, याहुवाह के नये चाँद के दिनों को अस्वीकार कर दिया और शनि के दिन या शनिवार को उपासना करने की पुरानी स्थिति में लौट गये.

“ग्रहों की उनके विशिष्ट दिनों पर प्रार्थना स्वर्गीय मण्डल की उपासना का एक भाग था.” (R.L. Odom, Sunday in roman Paganism, p 158)

इस प्रकार की उपासना याहुवाह को स्वीकार्य नहीं है. आमोस में, शनि की उपासना के लिये उनको दोषी ठहराते हुए याहुवाह ने घोषणा की:

“हाय उन पर जो सिय्योन में सुख से रहते, और उन पर जो सामरिया के पर्वत पर निश्चिन्त रहते है,….तुम बुरे दिन को दूर कर देते, और उपद्रव की गद्धी को निकट ले आते हो….इस कारण वे अब बंधुआई में पहले जाएँगे,……सेनाओं के याहुवाह ने अपनी ही शपथ खाकर कहा है जिस पर याकूब घमण्ड करता है उससे मैं घृणा रखता हूँ….मैं इस नगर को उस सब समेत जो उसमें है शत्रु के वश में कर दूँगा.” (आमोस ६: १,३,७-८)

उन सब के लिये जो आधुनिक झूठे कैलेन्डर के अनुसार शनिवार के दिन उपासना के साथ चिपके हुए हैं और बाइबल के चंद्र-सौर्य कैलेन्डर के अनुसार नये चाँद और सब्त को मानने के दायित्व से इनकार करते है यही भाग्य बाट जोह रहा है.

सभी सब्त और “फिर मैंने उनके लिये अपने विश्रामदिन ठहराए जो मेरे और उनके बीच चिन्ह ठहरें; कि वे जानें कि मैं याहुवाह उनका पवित्र करनेवाला हूँ.” (यहेजकेल २०:१२)

वास्तव में, सब्त और नये चाँद के दिनों पर सृष्टिकर्ता की उपासना नई पृथ्वी पर अनन्तकाल तक के लिये छुटकारे का एक आनन्द होगा.



“क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूँ, मेरे सन्मुख बनी रहेगी, उसी

प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; याहुवाह की यही वाणी है. फिर ऐसा होगा कि एक

नये चाँद से दुसरे नये चाँद के दिन तक और एक विश्राम दिन से दूसरे विश्राम दिन तक समस्त प्राणी

मेरे सामने दंडवत करने को आया करेंगे; याहुवाह का यही वचन है.” (यशायाह ६६:२२-२३)


अभी समर्पित होइए कि आप सभी सब्त, विश्रामदिन, और वार्षिक पर्बों पर याहुवाह कि उपासना करेंगे. उन सभों के लिये जो उसकी जिसके पास जीवन की परिपूर्णता है सहभागिता चाहते हैं अकथनीय आनन्द बाट जोह रहा है.

निश्चय तुम मेरे विश्रामदिनों को मानना, क्योंकि तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में मेरे और तुम लोगों के बीच यह एक चिन्ह ठहरा है, जिस से तुम यह बात जान रखो कि यहुवाह हमारा पवित्र करनेहारा है। इस कारण तुम विश्रामदिन को मानना, क्योंकि वह तुम्हारे लिये पवित्र ठहरा है…सदा की वाचा का विषय जानकर माना करें। (देखिए निर्गमन 31:13,14,16.)

समझौता (वाचा)

वाचा” है, एक सर्वकालिक समझौता, यहुवाह और उसके लोगों के बीच।

सब्त एक “सदा की वाचा” है, जो यहुवाह और उसके लोगों के बीच एक सर्वकालिक समझौता है। ये चिह्न है जो यहुवाह के विश्वास योग्य अनुयायियों को दुनिया भर के बाकी लोगों से अलग करता है। न सिर्फ कोई भी दिन बाईबल आधारित विश्रामदिन है, “परंतु सातवाँ-दिन तेरे एलोहीम यहुवाह का विश्रामदिन है।” (देखिए निर्गमन 20:8). बहुत से मसीही पुनरुत्थान के सम्मान में रविवार पर उपासना करते है। वे रविवार को “प्रभु का दिन” कहते है और विश्वास करते है कि सातवाँ-दिन का विश्रामदिन “क्रुस पर हटा दिया” गया था। यहुवाह की दिव्य व्यवस्था सदा की है। यहुशूआ जब पृथ्वी पर था तब उसने भी विश्राम के दिन का पालन किया, और उसी तरह से उसके सभी प्रेरितो तथा पहले के मसीहियो ने भी किया। यहुशूआ ने सब्त के स्वामित्व का दावा किया जब उसने कहा: “मनुष्य का पुत्र तो सब्त का भी प्रभु है।” (मत्ती 12:8 NKJV.) धर्मशास्त्र का असली “प्रभु का दिन” सातवाँ-दिन सब्त है!

क्योंकि सच्चा विश्रामदिन एक विशिष्ट दिन है, यह अति महत्वपूर्ण है कि उस वास्तविक दिन को गिनने के लिए समय मापने की सही प्रणाली का उपयोग किया जाये। समूचे इतिहास में, समय मापने की विभिन्न प्रकार की प्रणालियों का उपयोग हो चुका है। अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका में तीन और पाँच दिनों वाले सप्ताह का उपयोग किया गया था। मिस्रियों और फ्रांस गणराज्य के सौर कैलेंडरो में लम्बाई में मापे हुए दस दिनों वाले सप्ताहों का प्रयोग किया गया। आधुनिक इस्लामी कैलेंडर एक चन्द्र कैलेंडर है जो पुरी तरह से चाँद की गतिविधियों पर आधारित है। सौर वर्ष की तुलना में चन्द्र वर्ष छोटा होता है, इसलिए रमजान ग्रेगोरियन कैलेंडर वर्ष के माध्यम से पीछे प्रवहमान प्रतीत होते है। ग्रेगोरियन कैलेंडर समय की लम्बाई पर आधारित है, ये सूर्य को आकाश के अंतर में एक विषुव से उसी विषुव तक की परिक्रमा पूरी करने के लिए लेता है। यह एक सौर कैलेंडर है।

समय को मापने में, इनमें से किसी भी तरीके का उपयोग करने में कुछ गलत नहीं है। जबकि दोनों ही समय को अलग-अलग तरीकों से मापते है। उसी प्रकार से, मीट्रिक प्रणाली मीटर का तथा शाही प्रणाली गज का उपयोग करती है: फिर भी दोनों ही प्रणालियां लम्बाई को ही मापती है। समय को मापने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रणालियों का उपयोग अच्छे से किया जा सकता है। तथापि, सच्चा सातवाँ-दिन सब्त एक विशिष्ट दिन है। उस वास्तविक दिन को पाने के उद्देश्य से, समय-गणना की एक विशेष प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। एक आदमी को “दाहिने से सातवें घर पर” जाने के लिये बोला जाये सही पते को ढूंढने में असमर्थ होगा अगर वह गलत गली पर हो। इससे पहले की वह सातवें घर से गिनना शुरु करें, सबसे पहले उसे सही गली पर होना होगा। समय का पालन करने की केवल वो प्रणाली जो सच्चा सातवाँ-दिन उजागर करती हो, सृष्टि का चन्द्र-सौर कैलेंडर है। केवल बाईबल सम्बंधी कैलेंडर उस वास्तविक दिन की सही गणना कर सकता है जो यहुवाह और उसके लोगों के बीच चिन्ह है।

यह सच है कि शनिवार आधुनिक सप्ताह का सातवाँ दिन है। फिर भी, यह शनिवार को धर्मशास्त्र का सातवाँ-दिन सब्त नहीं बनाता। आधुनिक सप्ताह मूर्तिपूजक ग्रहीय सप्ताह से आता है। जब यह जुलियन कैलेंडर द्वारा अपनाया गया था, सात दिवसीय ग्रहों का सप्ताह शनिवार से शुरु हुआ। आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग सच्चे सातवें दिन की गणनाचाँद के चरण के लिये नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसमें बाईबल सम्बंधी समय माप की महत्वपूर्ण विशेषता का अभाव है: चन्द्र महीनों का। सृष्टिकर्ता का कैलेंडर प्रत्येक महीने के नये चाँद के दिन से शुरु होता है। प्रत्येक नये महीने का प्रथम दिन नये चाँद का दिन है:

और दाऊद ने योनातान से कहां, “वास्तव में कल नया चाँद है, और मुझे राजा के साथ बैठकर भोजन करने के लिये असफल नहीं होना चाहिये”…..

फिर योनातान ने दाऊद से कहां, “कल नया चाँद है; और तुझे याद किया जायेगा, क्योंकि तेरी कुर्सी खाली रहेगी।”…..

फिर दाऊद मैदान में जा छिपा। और जब नया चाँद हुआ, राजा दावत खाने को बैठा…..परंतु दाऊद का स्थान खाली रहा। (1शमुएल 20:5,18,24-25, NKJV)

हिब्रू शब्द “महीना” के लिये कोडेस (chodesh) का वास्तविक अर्थ है:

“नया चाँद; महीना।” chodesh का उल्लेख एक “महीना” या एक नये चाँद से दूसरे नये चाँद के दिन तक की अवधि से कर सकते है। (chodesh, #2320,The New Strong’s Expanded Dictionary of Bible Words.)

जैसे कि बाईबल आधारित महीना नये चाँद के साथ शुरु होता है, साप्ताहिक विश्रामदिन कुदरती तौर पर चन्द्रमा से जुड़ा हुआ है। नये चाँद का दिन साप्ताहिक चक्र को पुन: शुरु करता है। यहुवाह ने ज्योतियों को आकाश में समय की गणना करने के स्पष्ट उद्देश्य से सृजा।

“दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हो” (उत्पत्ति 1:14, KJV)

शब्द “नियत समयों” लिया गया है, शब्द Mo’ed (मोएड) से।

Mō’ĕd (मोएड) या mō’ādāh (मोअ्डाह); मंडली, उत्सवी सभा; नियुक्त समय, संकेत….जब यहूदी त्यौहार नियमित अंतराल पर घटित हुए, यह शब्द उनके साथ निकट रुप से पहचाना गया था। Mo’ed का सभी धार्मिक सभाओं के लिए व्यापक अर्थों में प्रयोग किया गया था। यह खुद निवासस्थान के साथ करीब से जुड़ा हुआ था…[यहुवाह] वहाँ इस्त्राएलियों से विशिष्ट समयों पर अपनी इच्छा उजागर करने के प्रयोजन से मिला करता था। यह [यहुवाह] के लोगों की उपासनाओं की सभाओं के लिए….एक आम शब्द है। (#4150, Hebrew-Greek Key Word Study Bible)

चाँद और पृथ्वी

“उसने नियत समयों [Mo’ed] के लिए चन्द्रमा को नियुक्त (बनाया) किया है। (भजन संहिता 104:19 NKJV)

भजन संहिता इन तथ्यों को सुदृढ़ करती है कि चन्द्रमा को “seasons” (नियत समयों) या Mo’ed (मोएड) की विशिष्ट गणना के लिये बनाया गया था।

“उसने नियत समयों [Mo’ed] के लिए चन्द्रमा को नियुक्त (बनाया) किया है। (भजन संहिता 104:19 NKJV)

समूचे धर्मशास्त्र में नये चन्द्रमाओं को सातवें-दिन के विश्रामदिनों से जोड़ा गया था। वे सभी अपने द्वारा उपासना के दिनों के एक विशेष वर्ग में आते है।

“यहुवाह यों कहता है, भीतरी आंगन का पूर्वमुखी फाटक काम काज के छ: दिन बन्द रहे, परन्तु विश्रामदिन को खुला रहे। और नये चाँद के दिन भी खुला रहे। (यहेजेकल 46:1)

वार्षिक पर्व भी अविभाजित रुप से नये चाँद से जुड़े हुए है। क्योंकि उनकी गणना करने के लिए ये नामुमकिन है कि उन्हें सिवाय चन्द्र-मास के, किसी और पर गिना जाये।

नये चाँद के दिन, और पूर्णमासी को हमारे पर्व के दिन नरसिंगा फुको। क्योंकि यह इस्त्राएल के लिये विधि, और याकूब के एलोहीम का ठहराया हुआ नियम है। (भजन संहिता 81:3 और 4)

नये चाँद का दिन यहुवाह को पुन: समर्पण का दिन था। कोई भी व्यापार नये चन्द्रमाओ पर नहीं किया गया था। पथभ्रष्ट इस्त्राएली अकसर वहां की धार्मिक क्रियाओं से उनके व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले अवरोधो से मजबूरी में अधीर हो उठते थे।

“नये चाँद का दिन कब बीतेगा कि हम अनाज बेच पाये? और विश्रामदिन, की हम गेहूँ का व्यापार कर सके?” (आमोस 8:5, NKJV)

चूंकि हर चन्द्र-मास नये चाँद के दिन के साथ शुरु होता है, चन्द्र-मास की हर तारीख हमेशा सप्ताह के समान दिनों पर पड़ती है। नये चाँद का दिन हर महीने का प्रथम दिन है। यह कार्य सप्ताह के प्रथम दिन से गिना जाता है, जोकि सप्ताह का दूसरा दिन है। सातवें-दिन का विश्रामदिन चन्द्रमास के 8वे, 15वे, 22वे और 29वे दिन पर पड़ता है। यह समूचे धर्मशास्त्र में व्याख्या सहित है।

चूंकि साप्ताहिक चक्र हर नये चाँद के साथ शुरु होता है, ऐसा प्रतीत होता है कि चन्द्र सब्त ग्रेगोरियन सप्ताह द्वारा “प्रवहमान” रहते है। असलियत में, यह ग्रेगोरियन महीने ही है जो चन्द्रमासो के एक अति संगत प्रारुप के माध्यम से प्रवहमान है। जब सृष्टिकर्ता ने अपनी समय का पालन करने वाली सही प्रणाली को रचा, उसने अचूक और सुन्दर कैलेंडर के निर्माण के लिए सूर्य और चन्द्रमा दोनों का उपयोग किया: चन्द्र-सौर कैलेंडर का। चन्द्रमा महीनों को नियंत्रित करता है; सूर्य वर्षों को नियंत्रित करता है।

शनिवार सच्चे सातवें-दिन सब्त की एक जालसाजी है। ग्रेगोरियन कैलेंडर एक सौर कैलेंडर है। यह समय की गणना करने के लिए अपने आधार के रुप में केवल सूर्य का ही उपयोग करता है। यहां तक की नये चन्द्रमाओं को ग्रेगोरियन कैलेंडर पर गौर नहीं किया है। उनका निश्चित रुप से सातवें-दिन के विश्रामदिन के रूप में निर्धारण करने के लिए उपयोग नहीं किया गया है। जबकि समय की गणना के लिये किसी भी कैलेंडर का उपयोग किया जा सकता है, सृष्टि के चन्द्र-सौर कैलेंडर में केवल चन्द्रमा और सूर्य दोनों के संयुक्त कार्य का स्वर्ग के पवित्र Mo’ed उपासना के समयों: साप्ताहिक सातवाँ-दिन सब्त और वार्षिक पर्वों के निर्धारण करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

शैतान ने घोषित किया कि वह “समयों और व्यवस्थाओं” को बदल देगा” (देखिए दानिएल 7:25.) उसने दुनिया की अगुवाई करके समय मापने की एक नकली प्रणाली का उपयोग करने में एकमत करके ऐसा किया है: ग्रेगोरियन सौर कैलेंडर का।

“यहुवाह ने कहा है: “में यहुवाह हूँ, में बदलता नहीं।” (देखिए मलाकी 3:6) सब्त आज भी वैसे ही बन्धनकारी है जैसे यह सृष्टि के सप्ताह की समाप्ति पर था। जब उसने “सातवें दिन को आशीषित और पवित्र ठहराया।” (उत्पत्ति 2:3 NKJV). समूचे अनंतकाल के भविष्य में स्वर्ग के राज्य के प्रति ईमानदार रहने वाला हर कोई सृष्टिकर्ता की उपासना उन्हीं के कैलेंडर पर करेगा। सब्त की गणना के लिए उपयोग किया जाने वाला कैलेंडर चन्द्र-सौर कैलेंडर होगा। नये चन्द्रमाओं और सातवें-दिन के विश्रामदिन एक बार फिर से आनंद और धन्यवाद का समय होगा जब प्रेम और आभार की एक सामंजस्य धारा, एक संयुक्त सृष्टि से वापस सभी प्रेम के स्रोत से, सारी खुशियां और सारे आनंद तक बहेगी: यहुवाह सृष्टिकर्ता तक।

“क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूं, मेरे सम्मुख बनी रहेगी, उसी प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; यहुवाह की यही वाणी है। फिर ऐसा होगा कि एक नये चाँद से दूसरे नये चाँद के दिन तक और एक विश्रामदिन से दूसरे विश्रामदिन तक समस्त प्राणी मेरे सामने दण्डवत् करने को आया करेंगे; यहुवाह का यही वचन है।” (यशायाह 66:22 और 23)

झील के ऊपर चाँद

“होलिडे।” शब्द ज्यादातर लोगों के लिए एक उत्सव के लिए लागू किया जाता है खास तौर पर…क्रिसमस!

शब्द “होलिडे” की परिभाषा एक धार्मिक तत्व को प्रगट करती है। जिससे सभी लोग अंजान है।

होलिडे: “एक धार्मिक त्यौहार; [एक] पवित्र दिन।” (Webster’s New Universal Unabridged Dictionary)

क्रिसमस एक धार्मिक उत्सव है। आधुनिक उत्सव के सभी व्यापारिक साजों-सामान के बावजूद, क्रिसमस, दिल में, एक धार्मिक उत्सव बना रहता है। यह एक मौका है जब एक ईश्वर को याद और आदर किया जाता है।

मसीही लोग जीसस (यीशु) के जन्म को क्रिसमस के समय पर मनाते है। वे “कभी दिये गये महानतम दान” के आदर में उपहारों का आदान-प्रदान करते है। वे कहते है: “Jesus is the reason for the seasons!!” और मसीहा को वापस क्रिसमस में डालने की बात करते है।

समस्या यह है कि: यहुशूआ उद्धारकर्ता क्रिसमस के आरम्भ के साथ “में” कभी भी नहीं था । जबकि धर्मशास्त्र मुक्तिदाता की जन्मतिथि उपलब्ध नहीं करता है। ज्यादातर विद्वान सहमत है कि वह शरद् ऋतु में पैदा हुआ था, 25 दिसम्बर को नहीं।

यह खोजने के लिए कि क्रिसमस पर मौजूदा ईश्वर को सम्मानित किया जाता है, यह आवश्यक है कि इसके बुतपरस्त मूल का पता लगाया जाये।

25 दिसम्बर पर उत्सव मनाये जाने का आरम्भ बाढ़ के तुरंत बाद ही निर्मोद के पुनर्जन्म का रुप तम्मुज के जन्म के साथ शुरु हुआ। आज की क्रिसमस परम्पराएँ सीधे प्राचीन बेबीलोन और बुतपरस्त रोम से आती है।

शनि का बुत
शिशु बलि के शिकार के साथ शनि

रोमी लोग ईश्वर शनि का आदर, Saturnalia कहलाये जाने वाले एक सप्ताह लम्बे उत्सव के द्वारा दिसम्बर में करते थे। शनि रोम का, फसल कटाई और समय का देवता था, इसलिये उसे साधारणतया एक हँसुआ पकड़े हुए दर्शाया जाता था। सभी क्रूर देवताओं में वो सबसे अधिक निर्दयी ओर दुष्ट था। वह शिशु बलि की मांग करता था।

अकेले रोमी लोग इस दुष्ट देवता की उपासना नहीं करते थे। शनि की उपासना पुरातन संसार में भी प्रचलित थी। यहां तक की इस्त्राएली भी जब वे स्वर्ग के खिलाफ विद्रोह में थे, शनि की उपासना करते थे। ईश्वर जिसकी उपासना इस्त्राएल स्वधर्म त्याग में करते थे, शनि देव ही था। (बाईबल में जिसे रिफान, मोलेक और कैवन के रूप में संदर्भित किया गया है।) यहां तक की इस्त्राएली अपने बच्चों को इस नीच, रक्त के प्यासे देवता को बलि के रुप में चढ़ाते थे।

शनि [रुचि] अफ्रीकी बुतपरस्ती का विजेता बन गया था…वास्तव में…बाल-हम्मोन के रुप में Phoenician Carthage में, वह शिशु बलिदान की वस्तु था…हालाँकि एक फलदायक ईश्वर, शनि-बाल…के बावजूद भी वह निष्ठुरता में बलपूर्वक बलि ले लेता था।” (Quodvultdeus of Carthage, translation and commentaries, Thomas Macy Finn. pp 14 & 15.)

भले ही रोमी लोगों ने काफी पहले मानव बलिदान छोड़ दिया, दिसम्बर में saturnalia समारोह के दौरान योद्धाओं के द्वारा रक्त अभी भी बहाया जाता था। Saturnalia एक धार्मिक उत्सव था और सब यह समझते थे कि योद्धाओं के द्वारा रक्त बहाया जाना शनि को बलिदान चढ़ाया जाना था।

योद्धाओं के द्वारा किये गये तमाशे [शनि के लिए] पवित्र थे।” (John D. fuss, Roman Antiquities, p 359)

“रंगभूमि अपने योद्धाओं के लिये खुद दावा करती है, कि दिसम्बर के अंत में वे अपने रक्त से, हँसुआ धारण किये हुए स्वर्ग के पुत्र [शनि] को संतुष्ट करते थे।” (Asusonious, eclog, I.p. 156)

योद्धा saturnalia पर लड़ते थे, और…उन्होंने ऐसा शनि को शांत और संतुष्ट करने के उद्देश्य से किया।” (Justus Lipsius, tom. ii.Saturnalia Sermonum Libri Duo, Qui De Gladiatoribus, lib.i. cap. 5)

सिद्धांत जिस पर [योद्धाओं के] ये तमाशे होते थे संचालित किये गये थे…[जो] वे संतुष्ट योग्य बलिदान के रूप में मनाते थे…इस तरह की पुरुषों की भीड़ का वध रोमी अवकाश बनाने के लिये कर दिया जाता था।” तब यह याद किया जाता है कि शैतान खुद टुकड़ो में काट दिया गया था, यह देखना आसान है कैसे उसके जन्मदिन पर आदमियों के एक दूसरे को काटने में निर्धारण के द्वारा उसे एक स्वागत बलिदान चढ़ाने का विचार उठा होगा, उसके पक्ष को संतुष्ट करने के रूप में। (Alexander Hislop,The Two Babylons, p. 153)

हिंसा और रक्तपात के बावजूद, Saturnalia एक उत्सव मनाने और विवाह रचाने का समय था। इस अत्यधिक खून के प्यासे ईश्वर के आदर में प्राचीन काल में मनाए जा रहे बहुत से उत्सव आज भी समस्त संसार में क्रिसमस की परम्पराओं के रूप में मनाया जा रहे है।

इन परम्पराएँ को शामिल करते है:

यहां तक की क्रिसमस फादर की कल्पना, या सांता क्लाउस, शनि की विचित्र समानता धारण करता है: एक बुढ़ा आदमी, लम्बी दाढ़ी के साथ, बच्चों से घिरा हुआ।

शनि, दुष्ट, शिशु-बलि की मांग करने वाला बुढ़ा आदमी, आधुनिक समाज में दो और पोशाकों में दिखायी देता है। प्रत्येक दिसम्बर में शनि, समय का देवता “ओल्ड़ फादर टाइम” के रूप में फिर से उभरकर आता है। बेबी नव वर्ष बाल-शिकार का एक प्रतीक है।

एक डरावना प्रतिनिधित्व, समय का पिता एक नव वर्ष के बेबी के साथ 19वी शताब्दी के इस उदाहरण में पाया जा सकता है। (नीचे)। समय का ईश्वर (शनि, समय का ईश्वर के रूप में), एक बड़ी घड़ी के सामने अपना हँसुआ पकड़े हुए खड़ा है। पुराने वर्ष कब्र में कफन में लिपटे पूर्ण विकसित शरीर के समान बीत रहे है। नया वर्ष एक नन्हे बच्चे के समान आ रहा है। जबकि चित्र काफी अंधकारपूर्ण है, छोटे बच्चे पर आग से रोशनी हो रही है और दूसरी तरफ धुएँ के छल्ले है। आने वाले नए वर्षों को अभी भी बलि के लिए तैयार बच्चों के रूप में चित्रित किया गया है। शिशु बलि के शिकार बच्चे को हमेशा इतने अधिक पोषक तत्वों से ढँक दिया जाता था ताकि उनके माता-पिता पहचान ही न पाये कि उनका बच्चा जलाया गया था। इस वीभत्स ईश्वर के सभी विकृत तत्वों को इस चित्र में दिखाया गया है।

फादर टाइम

आधुनिक समाज में शनि भी अपने उजाड़ में आत्माओं की फसल इकट्ठे करनेवाले के रूप में उभरकर आता है। आधुनिक समाज में बहुत कम लोगों ने स्वीकार किया है कि फादर क्रिसमस, इस भयानक मृत्युकारी और “ओल्ड़ फादर टाइम” के अलावा सभी देवताओं में कोई और दूसरा घृणास्पद नहीं। हालांकि, एक प्राचीन तुरंत स्वीकार करेगा कि यह शनि को छोड़ और कोई दूसरा नहीं। लक्षण जोकि शनि की पहचान करते है वे वही है जो समय का बूढ़ा फादर और मृत्युकारी: हँसुआ और समय के टुकड़ो को चिन्हित करने की पहचान करते है।

कुछ ईमानदार लोगों द्वारा शनि का आदर करते हुए मूर्तिपूजक होलिडे से जुड़े रहने की आज बहुत सी दलीलें दी गयी है।

शनि क्रोरोनुस
मूर्तिपूजक तो सृष्टिकर्ता यहुवाह से अंजान थे। वे पिशाचो की उपासना करते थे क्योंकि वे इससे बेहतर नहीं जानते थे! आज क्रिसमस के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता।

धर्मशास्त्र सिखाता है कि:

इसलिये [यहुवाह] अज्ञानता के समयों में आनाकानी करके, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। (प्रेरितो के कार्य 17:30)

यह जानकर कि क्रिसमस एक मूर्तिपूजक होलिडे है, यह जानकर कि आधुनिक संस्कार प्राचीन मूर्तिपूजक संस्कारों के प्रतिरूप है जो शनि को आदर देते है, और फिर भी पाप से छुटकारे का दावा करना, क्योंकि किसी को ये पता है यह अत्यंत ही असंगत है।

क्रिसमस सचमुच एक होलिडे है: एक धार्मिक उत्सव। दुष्ट ईश्वर शनि का आदर करने के द्वारा स्वर्ग और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता यहुवाह का अनादर होता है।

उद्धारकर्ता ने स्वयं ही एक पवित्र सिद्धांत बताया जब उसने कहा:

कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, व एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा; “तुम..[यहुवाह] और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।” (मत्ती 6:24)

शनि के पास और दूसरे झूठे ईश्वरों से कही अधिक शैतान के समान गुण है। क्रिसमस उसका धार्मिक उत्सव है। क्रिसमस उत्सव में भाग लेना इस दुष्ट शैतानी देवता को आदर देना है।

पथभ्रष्ट इस्त्राएल के साथ-साथ मसीहियो के लिए, एक प्रेमी पिता के शब्द आज भी जोर से गूंजते है:

“इस में तो सन्देह नहीं कि जैसे विश्वासघाती स्त्री अपने प्रिय से मन फेर लेती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तू मुझ से फिर गया है…[यहुवाह] की यही वाणी है…क्योंकि वे टेढ़ी चाल चलते रहे हैं और अपने…[वाचा का पालन करने वाले, यहुवाह] को भूल गए हैं। हे भटकने वाले लड़कों, लौट आओ, मैं तुम्हारा भटकना सुधार दूंगा।” (यिर्मयाह 3:20-22)

मूर्तिपूजक रीतियों में भाग लेना सृष्टिकर्ता का अनादर करना है। अपने प्रेमी छुटकारा देने वाले के पास लौट आओ।

“और मसीह का बलियाल [दुष्टता] के साथ क्या लगाव? या विश्वासी के साथ अविश्वासी का क्या नाता? और मूरतों के साथ…[यहुवाह] के मन्दिर का क्या सम्बन्ध? इसलिये…[यहुवाह] कहता है, कि उन के बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्तु को मत छूओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा।” (2कुरिन्थियों 6:15-17)

उनके बीच में से निकल आओ! जो अशुद्ध है उसे मत छुओं! क्या आप बाहर आएंगे?