Heads-Up Raoul Pal, a world-renowned macro-economist, is not a student of the Bible. However, unbeknown to him, he provides in this video of a most likely scenario of how Rome will use the central banks to enforce the dreadful mark of the beast everywhere. This is not the time for His people to become complacent. We should be ready for the imminent unfolding of final events, and we should also pray for the acceleration of these events, so that this evil age will come to an end, to usher the way for the return of Christ to establish Yahuwah’s eternal kingdom on earth. Click here to watch the video.
पूरा चुका दिया
खतना का नियम और याहुवाह के लोगों के लिए ये अब क्यों जरूरी नहीं है इसका एक बाइबिल आधारित अध्ययन।
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अन्य भाषाओं में बोलना
याहुवाह ने पृथ्वी पर अपने लोगों के ऊपर प्रचुर दान प्रदान कर दिये है। सबसे पेचीदा, और अभी तक कम समझा गया स्वर्ग से प्रदान किया गया दान, भाषाओं में बोलने का है। यह लेख जांच करता है कि धर्मशास्त्र के अनुसार “भाषाओं में बोलने’ का असली अर्थ क्या होता है।
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पौलुस व गलातियों

बहुत से लोग आज गलातियों की पुस्तक से भ्रमित हो गये है। रविवार का पालन करने वाले दावा करते है कि सब्बात क्रुस पर चढ़ा दिया गया था। शनिवार का पालन करने वाले उन्हीं पदों का उपयोग यह दावा करने के लिए करते हैं कि याहुवाह के पर्व अब और बाध्यकारी नहीं है। हालांकि, शामिल मुद्दों की एक समझ पूरी तरह से कुछ और ही प्रकट करती है।

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व्यवस्था के अधीन? या अनुग्रह के अधीन?

“और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो” (रोमियो ६:१४)॥  इस पद के दुरुपयोग अनजाने में लाखों लोगों की शैतान के विद्रोह का समर्थन करने में अगुवाई की है! क्या आप उनमें से एक हैं? एक बाईबल आधारित तहकीकात कि सही मायने में “अनुग्रह के अधीन” होने का मतलब क्या होता है।  

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पौलुस, रोमी और सब्त

साधारणतया रोमियों १४ नये नियम के गलत अर्थ लगाये गए अध्यायों में से एक है. पौलुस के शब्दों को यहाँ तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है कि याहुवह के सब्त और पर्ब के दिन अब लागू नहीं है, और यह कि वे किसी भी दिन को, कोई भी दिन जब वे अपने काम से विश्राम करें सृष्टिकर्ता की उपासना कर सकते हैं. फिर भी इस अध्याय के सन्दर्भ का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने पर इस विचार की त्रुटि प्रगट होती है. पौलुस ने हमेशा सातवें दिन सब्त और पर्बों का पालन किया और अपने धर्मान्तरित लोगों को भी यही करने के लिए सिखाया!  

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यहुशुआ की मृत्यु : व्यवस्था का लोप?

धर्मशास्त्र हमेशा यह सिखाता है कि पवित्र व्यवस्था शाश्वत है. इसका पालन स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में अनन्तकाल तक निरन्तर चलने वाले चक्र में किया जाना चाहिए. यदि बाइबल का कोई सन्दर्भ यह सिध्द करने के लिये उपयोग किया जावे कि व्यवस्था क्रूस पर चढाई जा चुकी है तो यह शैतान के  झूठ को धर्मग्रन्थ के साथ लपेटना है कि पवित्र व्यवस्था का पालन करने की आवश्यकता नहीं है. इफिसियों २;१५ के स्पष्ट और सही अर्थ को तब ही समझा जा सकता है जब इस सन्दर्भ के पूरे अंश को पढ़ा जाए.  

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